कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ (Generations of Computer)

कम्प्यूटर क्या है? (What is Computer in Hindi?)

कम्प्यूटर एक स्वचालित तथा निर्देशों के अनुसार कार्य करने वाली इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जिसमें डेटा को प्राप्त, संग्रहित अथवा प्रदर्शित करने की क्षमता होती है। इस डिवाइस द्वारा प्राप्त डेटा का प्रयोग करते हुए किसी प्रोग्राम के निर्देशों के अनुसार गणितीय, तार्किक अथवा मैनिपुलेटिव क्रियाओं को करते हुए सूचना को विभिन्न इच्छित रूपों में प्रदर्शित किया जा सकता है। कोई कम्प्यूटर, बड़ा हो या छोटा, नया हो या पुराना, उसकी मूल संरचना सदा एक ही तरह की होती है। 

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ (Generations of Computer)

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ (Generations of Computer)



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'कम्प्यूटर' शब्द अंग्रेजी के आठ अक्षरों से मिलकर बना है, जो इसके अर्थ को और भी अधिक व्यापक बना देते हैं।

  • C - Commonly (कॉमनली)
  • 0  -Operated(ऑपरेटिड
  • M -Machine (मशीन)
  • P  -Particularly (पर्टिक्युलर्ली)
  • U  -Used for  Technical (टैक्निकल)
  • E  -Education and (एजुकेशन एण्ड)
  • R  -Research (रिसर्च)

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ (Generations of Computer)

दूसरे विश्व युद्ध के बाद कम्प्यूटरों का विकास तेजी से हुआ और उनके आकार-प्रकार में भी बहुत परिवर्तन हुए। हर पीढ़ी के  कम्प्यूटरों में पावरफुल तकनीकी का प्रयोग किया जाता है और उसके अकार में भी बदलाव किया जाता रहा है।

आधुनिक कम्प्यूटरों के विकास के इतिहास को तकनीकी विकास के अनुसार, कई भागों में बाँटा जाता है, जिन्हें कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ कहा जाता है। अभी तक कम्प्यूटरों की पाँच पीढ़ियाँ अस्तित्व में आ चुकी हैं।

जिस तरह मनुष्य की विभिन्न पीढ़ियाँ अपने रहन-सहन, आचार-विचार तथा परम्पराओं में एक-दूसरे से भिन्न-भिन्न होती हैं, ठीक उसी प्रकार विभिन्न पीढ़ियों के कम्प्यूटर, तकनीकी दृष्टि से भिन्न-भिन्न होते हैं।

प्रत्येक पीढ़ी के कम्प्यूटरों की विशेषताएँ और उनका संक्षिप्त परिचय निम्न हैं-

पहली पीढ़ी (First Generation)

उपलब्धि- वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube)

इस पीढ़ी का समय वर्ष 1940-56 तक माना जाता है। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में वैक्यूम ट्यूबों का प्रयोग किया जाता था।

उस समय वैक्यूम ट्यूब ही एकमात्र इलेक्ट्रॉनिक पुर्जा था, जो उपलब्ध था। इस पीढ़ी के कम्प्यूटर आकार में बहुत बड़े
होते थे और इतनी गर्मी पैदा करते थे कि एयर कण्डीशनिंग अनिवार्य होती थी।

ये गति में धीमे होते थे और इनका मूल्य भी तुलनात्मक दृष्टि से बहुत अधिक होता था। इसमें कोई ऑपरेटिंग सिस्टम न होने के कारण आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न
उपकरणों को जोड़ने या हटाने तथा स्विच आदि दबाने के कार्य उपयोगकर्ता को स्वयं ही करने पड़ते थे, जो बहुत ही
असुविधाजनक होते थे।

इस पीढ़ी के कुछ कम्प्यूटरों के नाम इस प्रकार हैं-

  • एनिएक
  • एडसैक
  • एडवैक
  • यूनीवैक -1
  • यूनीवैक-2
  • आई.बी.एम. 701
  • आई.बी.एम. 650
  • मार्क-2
  • मार्क-3 आदि।

दूसरी पीढ़ी (Second Generation)

उपलब्धि- ट्रांज़िस्टर (Transistor)

इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों का समय वर्ष 1956 -1963  तक माना जाता है।

इससे पहले अमेरिका की बैल  लैबोरेटरी (Bell Laboratory) ने ट्रांजिस्टर की खोज कर ली थी, जो वैक्यूम ट्यूब से बेहतर थे । 

इसलिए कम्प्यूटरों में वैक्यूम ट्यूबों का उपयोग समाप्त हो गया और ट्रांजिस्टरों का उपयोग होने लगा, इससे कम्प्यूटरों की दूसरी पीढ़ी अस्तित्व में आई।

इस पीढ़ी के कम्प्यूटर आकार में छोटे, गति में तेज तथा अधिक विश्वसनीय होते थे और उनकी लागत भी कम होती थी।

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 ये कम गर्मी उत्पन्न करते थे लेकिन फिर भी एयर कण्डीशनिंग की आवश्यकता रहती थी।

इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में इनपुट (Input) तथा आउटपुट (Output) के उपकरण बहुत सुविधाजनक होते थे,
जिससे डेटा स्टोर करना तथा परिणाम प्राप्त करना सरल था।

इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में आई.बी.एम. 1401  प्रमुख था, जो बहुत लोकप्रिय और बड़े पैमाने पर उत्पादित किया गया था।

इस पीढी के अन्य कम्प्यूटर इस प्रकार हैं-

  • आई.बी.एम. 1602  
  • आई.बी.एम. 7094 
  • सी.डी.एस. 3600 
  • आर.सी.ए. 501
  • यूनीवैक 1107  आदि।

इन कम्प्यूटरों का उपयोग प्रारम्भ में मुख्य रूप से वैज्ञानिक कार्यों में किया जाता था, लेकिन बाद में व्यापारिक कार्यों में भी किया जाने लगा।

तीसरी पीढ़ी (Third Generation)

उपलब्धि- एकीकृत परिपथ (Integrated Circuit)

इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों का समय वर्ष 1964 - 71  तक माना जाता है।

इनमें एकीकृत परिपथों या चिपों (Chips) का उपयोग किया जाता था, जो आकार में बहुत छोटे होते थे और एक चिप पर सैंकड़ों ट्रांजिस्टर को एकीकृत किया जा सकता था।

 इनसे बने कम्प्यूटर आकार में छोटे, गति में बहुत तेज तथा बहुत अधिक विश्वसनीय होते थे।

इनके कार्य करने की गति इतनी तीव्र थी कि ये एक सेकेण्ड में लाखों जोड़ने और घटाने की क्रियाएँ कर सकते थे।

 इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों के साथ ही डेटा को भण्डारित करने वाले बाहरी साधनों; जैसे- डिस्क, टेप आदि का भी विकास हुआ।

मुख्य मैमोरी पर पड़ने वाला दबाव कम हो गया और उनके लिए प्रोग्राम लिखना भी सरल हो गया।

 इसके कारण ही कम्प्यूटर पर एक साथ अनेक प्रोग्राम्स चलाना (Multi-programming) तथा एक प्रोग्राम एकीकृत परिपथ या चिप को कई प्रोसेसर्स पर एक साथ चलाना (Multi-processing) भी सम्भव हो गया।

इस पीढ़ी के कम्प्यूटर आकार में छोटे होने के साथ-साथ सस्ते भी होते थे, जिसके कारण छोटी कम्पनियों तथा सरकारी कार्यालयों में भी कम्प्यूटर लगाना सम्भव हुआ।

इस पीढ़ी के मुख्य कम्प्यूटर इस प्रकार हैं-

  • आई.बी.एम. 360 तथा 370 शृंखलाएँ (Series)
  • आई.सी.एल. 1900 तथा 2900  शृंखलाएँ
  • 6700 तथा 7700  शृंखलाएँ
  • यूनीवैक 9000 शृंखलाएँ
  • सी.डी.सी. 3000 
  •  6000  तथा 7000  श्रृंखलाएँ
  • हनीवैल 6000 तथा 200 श्रृंखलाएँ
  • पी.डी.पी. 11/45   आदि।

चौथी पीढ़ी (Fourth Generation)

उपलब्धि-माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor)

इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों का समय वर्ष 1971 से वर्तमान समय तक माना जाता है। इनमें केवल एक सिलिकॉन चिप पर कम्प्यूटर के सभी एकीकृत परिपथों को लगाया जाता है, जिसे माइक्रोप्रोसेसर कहा जाता है।

वास्तव में, ये अति वृहद् एकीकृत परिपथ (Very Large Scale Integrated Circuit-VLSI) हैं, जिनमें एक माइक्रोचिप पर हजारों-लाखों ट्रांजिस्टरों को लगा दिया जाता है। 

इन चिपों का उपयोग करने वाले कम्प्यूटरों को माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer) कहा जाता है।

ये कम्प्यूटर आकार में बहुत छोटे होते हैं, जो एक मेज पर भी आ जाते हैं। इनमें बिजली की खपत बहुत कम होती है तथा ये सामान्य तापक्रम पर भी कार्य करने में समर्थ होते हैं।

इनका मूल्य इतना कम होता है कि सामान्य लोग भी इन्हें खरीद सकते हैं। छोटे-छोटे कम्प्यूटरों की एक श्रेणी भी
अस्तित्व में आ गई है, जिन्हें व्यक्तिगत कम्प्यूटर (Personal Computer) या पीसी (PC) कहा जाता है।

इनमे पेण्टियम चिप पर कार्य करना बहुत ही सरल और बहुत कम खर्चीला है। जिससे पर्सनल कम्प्यूटरों की एक ऐसी श्रृंखला भी बन गई है, जो गति और क्षमता में बड़े-बड़े कम्प्यूटरों से टक्कर लेते हैं।

इन्हें पेण्टियम (Pentium) कहा जाता है, क्योंकि ये इण्टेल (Intel) नामक कम्पनी द्वारा बनाए गए माइक्रोप्रोसेसरों की पेण्टियम नामक श्रृंखला पर आधारित हैं। वर्तमान में इनका उपयोग और उत्पादन भारी संख्या में किया जा रहा है।

माइक्रो कम्प्यूटर बनाने वाली कम्पनियों की एक बहुत बड़ी
संख्या है, जो विभिन्न श्रेणियों के पर्सनल कम्प्यूटर; जैसे- पीसी-एक्सटी, पीसी-एटी, पेण्टियम आदि बनाती हैं।

ऐसी कुछ कम्पनियों के नाम इस प्रकार है-

  • आई.बी.एम.
  •   एच.सी.एल.
  •   विप्रो
  •   जेनिथ आदि।
   
वर्तमान में, प्रारम्भिक श्रेणियों के पीसी का उपयोग प्रायः समाप्त हो गया है और केवल पेण्टियम श्रेणी के कम्प्यूटर प्रचलन में हैं, जिनकी चार श्रेणियाँ पेण्टियम 1 से लेकर पेण्टियम 4 तक अस्तित्व में आ चुकी हैं।


कंप्यूटर ग्राफिक्स क्या है? what is computer graphics? 

कंप्यूटर ग्राफिक्स कंप्यूटर का उपयोग करके दृश्य सामग्री के निर्माण, हेरफेर और प्रतिनिधित्व को संदर्भित करता है। इस तकनीक ने हमारे संचार और डिजिटल मीडिया के साथ बातचीत करने के तरीके में क्रांति ला दी है, और मनोरंजन, शिक्षा, चिकित्सा, वास्तुकला, इंजीनियरिंग, और अधिक सहित विभिन्न क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोग हैं।


कंप्यूटर ग्राफिक्स को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:

  •  2डी ग्राफिक्स और 
  • 3डी ग्राफिक्स। 

2D ग्राफ़िक्स का उपयोग आमतौर पर लोगो, आइकन और चित्र जैसी सपाट छवियां बनाने के लिए किया जाता है।

 दूसरी ओर, 3डी ग्राफिक्स का उपयोग वस्तुओं और वातावरण के त्रि-आयामी मॉडल बनाने के लिए किया जाता है, जिसे किसी भी कोण से देखा और हेरफेर किया जा सकता है।

कंप्यूटर ग्राफ़िक्स में उपयोग की जाने वाली कई अलग-अलग तकनीकें और तकनीकें हैं, जिनमें रास्टर ग्राफ़िक्स, वेक्टर ग्राफ़िक्स और 3D मॉडलिंग शामिल हैं। रेखापुंज ग्राफिक्स, जिसे बिटमैप ग्राफिक्स के रूप में भी जाना जाता है, पिक्सेल (छोटे डॉट्स) से बने होते हैं जो अलग-अलग रंगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस तकनीक का उपयोग फोटोग्राफ और डिजिटल पेंटिंग जैसी छवियां बनाने के लिए किया जाता है।

दूसरी ओर, वेक्टर ग्राफिक्स, रेखाओं और वक्रों से बने होते हैं जिन्हें गणितीय रूप से परिभाषित किया जाता है। यह उन्हें गुणवत्ता खोए बिना ऊपर या नीचे करने की अनुमति देता है, जिससे वे लोगो और अन्य ग्राफिक्स बनाने के लिए आदर्श बन जाते हैं जिन्हें बार-बार आकार देने की आवश्यकता होती है।

3डी मॉडलिंग में विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग करके त्रि-आयामी वस्तुओं और वातावरण का निर्माण शामिल है। इन मॉडलों का उपयोग एनिमेशन, आभासी वास्तविकता अनुभव और वीडियो गेम बनाने के लिए किया जा सकता है।

कंप्यूटर ग्राफिक्स का उपयोग विभिन्न प्रकार के उद्योगों में किया जाता है, जिसमें मनोरंजन भी शामिल है, जहां उनका उपयोग फिल्में, टीवी शो और वीडियो गेम बनाने के लिए किया जाता है। उनका उपयोग मानव शरीर के 3डी मॉडल बनाने के लिए, वर्चुअल बिल्डिंग डिजाइन बनाने के लिए वास्तुकला में और जटिल प्रणालियों के सिमुलेशन बनाने के लिए इंजीनियरिंग में भी किया जाता है।


अंत में, कंप्यूटर ग्राफिक्स एक ऐसा क्षेत्र है जिसने डिजिटल मीडिया के साथ हमारे बनाने और बातचीत करने के तरीके को बदल दिया है। यथार्थवादी 3D मॉडल, आश्चर्यजनक दृश्य प्रभाव और इमर्सिव आभासी वातावरण बनाने की अपनी क्षमता के साथ, कंप्यूटर ग्राफिक्स उद्योगों की एक विस्तृत श्रृंखला में एक आवश्यक उपकरण बन गए हैं




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